गिलोय प्राण-दाता बनाम प्राण-हंता

You are currently viewing गिलोय प्राण-दाता बनाम प्राण-हंता

गिलोय प्राण-दाता बनाम प्राण-हंता

साथियों नमस्कार जैसा कि हम सभी जानते हैं कि गिलोय हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि हैl यह हमें प्राण प्रदान करती हैं यह हमें अमृत देती है, जिसके फलस्वरूप आदमी की आयु काफी बढ़ जाती है यह रोगों से लड़ने की क्षमता तो देते ही है, साथ ही साथ हमें मजबूत और सुडौल भी बनाती हैl इसके बहुत से फायदे हैं जिसको हम आगे विवरण में दे रहे हैं और इसके कुछ नुकसान भी हैं जिसको हमें ध्यान में रखना चाहिएl हर एक चीज के अपने फायदे और नुकसान होते हैं कोई भी चीज हद से ज्यादा अच्छी नहीं होती हैl वैसे ही यह बात गिलोय के ऊपर भी लागू होती हैl

अब हम देखेंगे इस पोस्ट में की गिलोय हमारे लिए प्राण हंता कैसे बन जाता हैl सबसे पहले हम देख लेते हैं कि इसके क्या फायदे हैंl गिलोय के पत्ते स्वाद में कसेले होते हैं, थोड़े से कसेले थोड़े से कड़वे होते हैं और तीखे भी लगते हैं जो सामान्य तौर पर पसंद नहीं किया जाताl ऐसा स्वाद होता है गिलोय काl गिलोय का उपयोग वात पित्त और कफ को ठीक करने के लिए किया जाता हैl गिलोय एक ऐसी औषधि है जो हमारे पाचन शक्ति को भी बढ़ाती हैl यह प्यास, जलन, डायबिटीज, कुष्ठ, पीलिया, आदि रोगों में भी लाभ पहुंचाती हैl यह हमारे आंखों को भी लाभ पहुंचाती हैl इसके साथ ही साथ यह मनुष्य के वीर्य और बुद्धि को बढ़ाती हैl बुखार, उल्टी, खांसी, हिचकी और भी तमाम रोगों में ही लाभप्रद होती हैl यह चाहे पुरुष हो चाहे महिला हो सबके कमजोरी की स्थिति में बहुत अधिक लाभ पहुंचाती हैl

इस फोटो में आप गिलोय के आगे के हिस्से दो देख सकते हैं।

गिलोय की पहचान कैसे करें

अब सबसे पहले जरूरी है कि हम गिलोय को पहचाने कैसे? गिलोय को हम कैसे पहचानेंगे? गिलोय क्या है? यह भी जानना जरूरी है, क्योंकि गलती में कभी-कभी लोग गिलोय के जगह पर कुछ और औषधि जो हमारे झाड़ियों में बाग बगीचों में उगी रहती है बिल्कुल गिलोय जैसी लगती है, का उपयोग कर लेते हैं, और उसका दुष्परिणाम उनको भुगतना पड़ता हैl हमें सबसे पहले पहचानना है कि गिलोय क्या होता है? गिलोय को हम अमृता और अमृत बल्ले के नाम से भी जानते हैंl यह हमारे बगीचों में झाड़ियों में बहुत ही आसानी से मिल जाती है, बस हमें पहचानना होता है। यह एक ऐसी बेल होती है, लता होती है, जो कभी मरती नहीं है। सूखती नहीं है। इसका तना देखने में रस्सी जैसा लगता है। और उस पर छोटे छोटे दाने होते हैं। इसके कोमल तने से और शाखाओं से जड़े निकल आती हैं। इसका यदि कोई टहनी पेड़ पर ही टूट करके लटका हुआ है, उसका जमीन से संपर्क नहीं है, तो भी उसमें से जड़े निकल आएंगी और पत्तियां निकल आएंगी। धीरे-धीरे करके वह जड़ जमीन तक पहुंच जाती है, और उसको सपोर्ट करने लगती है।

गिलोय में फूल भी आते हैं, जो पीले व हरे रंग के होते हैं। और गुच्छे में होते हैं। इसके पत्ते कोमल तथा पान के पत्ते के आकार के होते हैं। और इसका जो फल होता है वह मटर के दाने जितना बड़ा होता है, जो आप फोटो में देख रहे हैं। आप फोटो को देखिएगा तो अच्छे से समझ में आएगा इसकी सबसे बड़ी खासियत होती है कि जिस पेड़ पर चढ़ता है, गिलोय उसके गुणों को भी अपने गुण में मिला लेता है। जैसे नीम के पेड़ पर चढ़ा तो नीम का जो गुण होता है वह गिलोय में मिल जाता है तो इस तरह से जो नीम के पेड़ वाली गिलोय होती है वह सबसे अच्छी मानी जाती है। तो इसमें इसकी जो शक्ति होती वह काफी बढ़ जाती है। इस प्रकार गिलोय हमें यह भी देख कर यूज करना होता है कि हम किस पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसमें आप गिलोय के छोटे-छोटे फूलो के देख सकते हैं। अभी इसमें फल नही लगे हैं।

आँखों के लिए गिलोय के फायदे-

आंखों के लिए देखते हैं कि आंखों को गिलोय कैसे फायदा पहुंचाता है। कहा जाता है वैसे प्रयोग करने से पहले आप किसी एक्सपर्ट डॉक्टर से जरूर सलाह लीजिए, जो डॉक्टर आयुर्वेद से है उनसे जरूर सलाह लीजिए।ऐसा कहा जाता है जो आचार्य बालकृष्ण ने भी कहा है। अपनी पोस्ट में अपनी वीडियो में वह अक्सर बताते रहते हैं। उनके अनुसार यदि 10 मिलीलीटर गिलोय के रस में 1 ग्राम शहद और सेंधा नमक मिलाकर खूब अच्छी प्रकार से खरल में पीस लिया जाए और उसको आंखों में काजल की तरह लगाया जाए तो इससे अंधेरा छाना चुभन और काला तथा सफेद मोतियाबिंद रोग ठीक होते हैं। इस तरह से गिलोय हमारी आंखों को फायदा करता है।

इसके अलावा दूसरा इसका जो प्रयोग है उसको भी देख लेते हैं यह भी हमें कहीं से मिला है तो गिलोय रस में त्रिफला मिलाकर काढ़ा बनाया जाए और 10 से 20 मिलीलीटर काढ़ा में 1 ग्राम पिंपरी चूर्ण व शहद मिलाकर सुबह और शाम सेवन किया जाए तो ऐसा माना जाता है कि आंखों की रोशनी बढ़ती है लेकिन जब भी आपको गिलोय का सेवन करिए तो ध्यान रखिए कि जो मात्रा निर्धारित की गई है उसी मात्रा में उसी अनुपात में आप औषधि का सेवन करें तभी फायदा करेगी अन्यथा नुकसान भी कर सकती है।

कान के किए गिलोय के प्रयोग

अब चले देखते हैं कान के लिए गिलोय कैसे फायदेमंद होती है तो जब भी आपके कान में समस्या हो तो गिलोय के तने को पानी में घिस लेना चाहिए, और घिसने के बाद पानी को गुनगुना कर लेना चाहिए, इसके बाद कान में दो-दो बूँद दिन में 2 बार डालना चाहिए। इससे कान की जो मेल होती है, गंदगी होती है, जिसे हम देहात में खूँट भी कहते हैं, वह निकल जाती है। कान के बीमारी से राहत पाने के लिए जब भी आपके कान में परेशानी हो तो सही दवा तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। गिलोय के औषधीय गुण बिना कोई नुकसान पहुंचाए कान से मैल निकालने में मदद करते हैं, तो इसप्रकार इसका प्रयोग कान से मैल निकालने में भी किया जाता है।

टी. बी. के लिए गिलोय का प्रयोग

अब चलिए जानते है टी. बी. जो कि बहुत घातक रोग है। पहले यह जानलेवा भी था, लेकिन अब इसमें काफी नियंत्रण हम सब पा चुके हैं। वैज्ञानिक उपलब्धियां हमारी काफी बढ़ी हैं। जो टीवी रोग होता है उसमें गिलोय काफी फायदा पहुंचाता है। चलिए देखते हैं, गिलोय टीवी रोग में कैसे फायदा पहुंचाता है। जिन लोगों को टीवी की समस्या है, टीवी से निजात पाना चाहते हैं, वह गिलोय का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको अश्वगंधा, गिलोय, शतावर, दशमूल, बलामूल, अडूसा, पोहकरमूल तथा अतीस को बराबर भाग लेकर इसका काढ़ा बना लेना चाहिए। 20-30 मिलीलीटर काढ़ा को सुबह और शाम सेवन करना चाहिए। इससे जो टीवी का रोग होता है वह ठीक होने लगता है। उसमें आपको फायदा नजर आने लगता है। इस दौरान दूध का सेवन भी आप कर सकते हैं। लेकिन जब भी आप किसी भी औषधि का, किसी भी मिश्रण का, या काढ़ा का इस्तेमाल करें, तो आप चिकित्सक से जरूर संपर्क कर लें।

गिलोय के अन्य फायदे

आगे हम जानेंगे कि गिलोय किस-किस रोग में फायदा पहुंचाता है। इस पोस्ट को पढ़ने से पहले, जो आयुर्वेद के एक्सपर्ट हैं उनसे आप जरूर संपर्क करिए। गिलोय के बारे में जो मान्यताएं हैं, जो हम कहीं से पढ़े हैं, सुने हैं, उसी को बता रहे हैं, तो चलिए देखते हैं गिलोय कहां-कहां फायदा पहुंचाता है। गिलोय आंख के बीमारी में भी लाभ पहुंचाता है। गिलोय का किस बीमारी में कैसे इस्तेमाल करना है इसके लिए आप अच्छे से पोस्ट को पढ़िए, साथ ही साथ कहीं और से भी जानकारी प्राप्त करिए। कान की मैल निकालने के लिए भी गिलोय का इस्तेमाल किया जाता है। हिचकी बंद करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। टीबी रोग में भी काफी फायदेमंद होता है। उल्टी रोकने के लिए भी, और यहां तक गिलोय के सेवन से कब्ज की शिकायत भी दूर होती है। जिन लोगों को बवासीर की शिकायत होती है वह लोग भी गिलोय का इस्तेमाल कर सकते हैं। पीलिया रोग (जॉन्डिस) में भी काफी फायदा पहुंचाता है लेकिन इसके लिए आपको चिकित्सक के परामर्श की जरूरत होती है। आप संपर्क करके यह पता कर लीजिए कि किन-किन औषधियों से हम मिश्रण तैयार करते हैं या घोल तैयार करते हैं, काढ़ा तैयार करते हैं। गिलोय को कितनी मात्रा में हमें उपयोग में लेना है इसकी भी जानकारी होनी चाहिए।

इसके अलावा लीवर विकार को ठीक करना, डायबिटीज, मूत्र रोग जिसमें रुक-रुक कर पेशाब आना, में भी काफी फायदा पहुंचाता है। गठिया रोग में, फाइलेरिया, बुखार उतारने के लिए भी गिलोय का इस्तेमाल किया जाता है। हम सभी जानते हैं कि कोरोनावायरस फैल रहा था ऐसे में गिलोय ने काफी मदद की है। गिलोय ने काफी सपोर्ट किया है, जिसका परिणाम रहा कि बहुत से लोग कोरोना के कहर से बच गए। कोरोनावायरस को हराने में गिलोय का काफी महत्वपूर्ण रोल रहा है। जब भी ब्लड में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है तो गिलोय का सुझाव दिया जाता है, कि आप गिलोय का इस्तेमाल करिए। एसिडिटी को भी गिलोय ठीक करता है। गिलोय के लगातार इस्तेमाल करने से हृदय रोग भी ठीक हो सकता है और ठीक होता है। गिलोय कैंसर में फायदेमंद होता है यदि गिलोय का इस्तेमाल उचित अनुपात में किया जाए तो हम कैंसर से भी लड़ सकते हैं। चिकनगुनिया और डेंगू में भी गिलोय का सेवन किया जाता है। इस प्रकार हमने देखा कि गिलोय हमें लिए किन-किन रोगों से लड़ने की शक्ति देता है।

हमें सिर्फ यह बताना है इस पोस्ट में कि गिलोय हमारे लिए वह किस तरह से प्राण-दाता है। इस तरीके से हमने देखा कि गिलोय हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो हमें स्वर्ग से मिली है यह ऐसी औषधि है जो हमारे पृथ्वी वासियों को स्वास्थ्य प्रदान करती है। इस तरह से गिलोय हमारे लिए निश्चित रूप से प्राण-दाता है।

गिलोय प्राण-हन्ता

अब हम इसके दूसरे पक्ष को देखेंगे कि गिलोय प्राण हंता किस तरीके से हैं। इस पक्ष को आपको अवश्य ही पढ़ना चाहिए, क्योंकि गिलोय तो हमारे लिए निःसंदेह बहुत महत्वपूर्ण है। अमृत समान है। लेकिन इससे हमें अप्रत्यक्ष रूप से कितना नुकसान होता है, यह जानना चाहिए। तो चलिए हम पॉइंट वाइज देखते हैं कि गिलोय हमारा किस तरीके से नुकसान करती है।

1- जो पहला पॉइंट मैंने रखा है वह बहुत ही महत्वपूर्ण है। और हम सब की नजर से दूर रहता है, लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण फैक्टर है। हम सबको इस पर ध्यान देना चाहिए और अपने क्षेत्र में इस पर काम करना चाहिए। साथियों हम सभी जानते हैं कि वृक्ष हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण रोल अदा करते हैं। वृक्ष हमारे पर्यावरण को शुद्ध करते हैं। हमारे पृथ्वी को जीवन देते हैं। हमें वायुमंडल देते हैं। सब कुछ हमें पेड़ों से ही प्राप्त होता है। इसतरह मालूम पड़ता है कि वृक्ष हमारे लिए किसी ईश्वर से कम नहीं हैं। प्रकृति हमारे लिए ईश्वर समान है, तो प्रकृति को बचाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी हो जाती है। गिलोय भी उसी में से एक हिस्सा है, तो गिलोय को भी हमें बचाना है। साथ ही साथ गिलोय में एक ऐसा गुण होता है कि यह जहां रहता है वहाँ किसी और को काबिज नहीं होने देता है। यह जिस भी पेड़ के ऊपर चढ़ जाता है उसको मार मार देता है। इसमें इतनी शक्ति होती है यह खुद को किसी भी परिस्थिति में, चाहे कितना भी धूप हो, चाहे पानी मिले ना मिले, अपने आप को मरने नहीं देता है। क्योंकि इसमें इतनी शक्ति होती है, यह अमर बेल है। लेकिन पेड़ जिस पर इस को चढ़ाया जाता है या चढ़ जाता है, वह खुद ब खुद अपने भोजन के लिए तरस जाता है क्योंकि यह गिलोय उसकी पत्तियों को ढक लेता है ढकने के बाद उस पेड़ का प्राण निकल जाता है। इस तरीके से गिलोय प्राण हंसता हुआ। वृक्ष के प्राण को हारने वाला हुआ। और जब वृक्ष नही रहेंगे तो प्रकृति नही रहेगी, और जब ये सब नही रहेंगे तो मनुष्य कहाँ से रहेंगे। यह बहुत ही गंभीर विषय है, आप इस मामले को और अच्छे से तब समझ पाएंगे जब आप नीचे लगे फोटोज को देखेँगे। नीचे लगे फोटोज में आप देख सकते हैं कि कैसे गिलोय वृक्ष को नष्ट कर रहे हैं। सिर्फ गिलोय ही नही और भी बहुत से लताएँ।कहीं-कहीं तो पूरे-पूरे बाग नष्ट हो जा रहे हैं। यह विचारणीय है कि तैयार वृक्ष यदि इसी तरह से नष्ट होते रहे तो पृथ्वी संकट में आ जायेगी। नए वृक्ष को तैयार होकर पुराने वृक्ष की जगह लेने में काफी समय लगेगा। ऐसे में हमारे पर्यावरण का क्या होगा?

2- अब इसी का नाम दूसरा पॉइंट देखते हैं। मैं अपने क्षेत्र की बात बता रहा हूं, आपको जितने बगीचे दिखेंगे उसमें से लगभग 40 से लेकर के 60 प्रतिशत तक पेड़ों पर गिलोय कब्जा जमाए हुए हैं। वह हमारे वृक्षों को मार दे रहा है और हम कुछ भी नहीं करते हैं। हम बिल्कुल ध्यान ही नहीं देते हैं। उस तरफ जो कि बहुत ही गंभीर मामला है। हमें इस पर ध्यान देना चाहिए। गिलोय हमारे लिए फायदेमंद है ठीक है तो हमें औषधि के तौर पर ही उसको रखना चाहिए, हद से ज्यादा नहीं बढ़ने देना चाहिए। जैसे कि यह सारे वृक्षों पर चढ़ जाए तो सारे वृक्ष नष्ट हो जाएंगे। तो आप ध्यान दीजिए कि गिलोय जब भी आपके पेड़ों पर चढ़ रही हो तो गिलोय को उतना ही बढ़ने दीजिए जितना आपके लिए फायदेमंद हो। यदि गिलोय सभी पेड़ों पर चढ़ने लगे तो बिल्कुल अपने पेड़ को साफ करिए। इस को नष्ट करिए, नहीं तो फिर यह सारे पेड़ों को नष्ट कर देगी। हमारा जो प्राणवायु है वह हमसे दूर चला जाएगा और हम सभी लोग पृथ्वी वासी अपना अस्तित्व खो देंगे। इस तरीके से यह बहुत बड़ा मसला है गिलोय भी हमारे लिए प्राण-हंता है। तो उम्मीद करता हूं यह पोस्ट आपके समझ में आई होगी। यदि पोस्ट अच्छी लगी हो तो पोस्ट को जरुर शेयर करें और सब तक पहुचाइए।

Share This Post: